Patna High Court Judgment: सलवार उतारने की कोशिश Attempt to Rape नहीं?
Patna High Court explains legal difference between molestation and rape attempt.

पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए कोर्ट ने क्या कहा
पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी महिला के साथ हुई हर छेड़छाड़ या यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) की घटना को सीधे तौर पर Attempt to Rape (रेप का प्रयास) नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, किसी भी मामले में कौन-सी धारा लागू होगी, इसका फैसला उस मामले के तथ्यों (Facts), साक्ष्यों (Evidence) और आरोपी की मंशा (Intention) को ध्यान में रखकर किया जाता है।
यह टिप्पणी कोर्ट ने वर्ष 2008 के एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को Attempt to Rape का दोषी ठहराया था।
क्या था पूरा मामला?
मामला साल 2008 का है। शिकायत के मुताबिक, फोटो स्टूडियो संचालक हिमांशु कुमार पाठक उर्फ मिथिया पाठक ने एक महिला को स्टूडियो के अंदर बंद कर दिया। आरोप है कि उसने महिला की छाती दबाई और उसकी सलवार उतारने की कोशिश की।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 376/511 (Attempt to Rape) के तहत दोषी करार दिया था। बाद में आरोपी ने इस फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
9 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह (Justice Purnendu Singh) ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर Attempt to Rape का आरोप साबित नहीं होता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी की कथित हरकतें IPC की धारा 354 या अन्य संबंधित धाराओं के तहत अपराध हो सकती हैं, लेकिन उन्हें हर हाल में Attempt to Rape नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?
हाई कोर्ट के अनुसार, केवल किसी महिला की छाती दबाना या उसके कपड़े उतारने की कोशिश करना ही Attempt to Rape साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यह साबित होना भी जरूरी है कि आरोपी की बलात्कार करने की स्पष्ट मंशा थी और उसने उस दिशा में ऐसा प्रत्यक्ष कदम उठाया था, जो केवल तैयारी नहीं बल्कि वास्तविक प्रयास (Actual Attempt) माना जाए।
इस फैसले का क्या मतलब है?
इस फैसले का मतलब बिल्कुल भी यह नहीं है कि महिला के साथ छेड़छाड़, अश्लील हरकत या जबरन कपड़े उतारने की कोशिश अपराध नहीं है।
अदालत ने केवल इतना कहा कि इस विशेष मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर Attempt to Rape का आरोप साबित नहीं हो सका। ऐसे कृत्य अब भी कानून के तहत दंडनीय हैं और उन पर अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि हर आपराधिक मामले का फैसला उसके अपने तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग किया जाता है।
Key Highlights
Point | Details |
|---|---|
Court | Patna High Court |
Judgment Date | 9 July 2026 |
Incident Year | 2008 |
Judge | Justice Purnendu Singh |
Trial Court | आरोपी को Attempt to Rape का दोषी माना था |
High Court | Attempt to Rape का आरोप साबित नहीं माना |
Court Observation | हर Molestation का मामला Attempt to Rape नहीं होता |
निष्कर्ष
पटना हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय आपराधिक कानून में Molestation और Attempt to Rape के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट करता है। अदालत ने आरोपी को निर्दोष नहीं बताया, बल्कि केवल यह कहा कि उपलब्ध साक्ष्य Attempt to Rape की कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करते।
ऐसे मामलों में पूरे फैसले और उसके कानूनी आधार को समझना जरूरी है। केवल सोशल मीडिया पोस्ट या छोटी हेडलाइन देखकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।
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