Jaipur News: छात्रसंघ चुनाव पर बवाल, 24 घंटे से टंकी पर डटे छात्रों ने सरकार से मांगा लिखित भरोसा
जयपुर के टोंक फाटक पर छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर एनएसयूआई के तीन छात्रों ने 40 घंटे तक पानी की टंकी पर प्रदर्शन किया। जानिए क्या हैं उनकी मांगें और सरकार ने क्या आश्वासन दिया।

राजधानी जयपुर में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर हड़ताल तेज़ हो गई है। एनएसयूआई के तीन छात्र नेताओं ने टोंक फाटक स्थित पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन किया है और करीब 40 घंटे तक वहाँ डटे रहे। जानिए पूरा मामला और छात्रों की मांगें।
तीन छात्रों ने टंकी पर किया प्रदर्शन: विजयपाल कुड़ी, कोशेन खान और विओना जाट ने टोंक फाटक स्थित पानी की टंकी पर चढ़कर छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग की।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा: छात्रों ने सरकार से ठोस आश्वासन न मिलने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिसमें वे केवल पानी पी रहे हैं।
सरकार ने बातचीत के लिए दिया आश्वासन: प्रशासन और पुलिस ने छात्रों को नीचे उतारने के प्रयास किए और उपमुख्यमंत्री से मुलाकात का भरोसा दिलाया।
सात दिन की अल्टीमेटम: छात्र नेताओं ने सरकार को अपनी मांगों पर फैसला लेने के लिए सात दिन का समय दिया है, अन्यथा आंदोलन तेज़ करने की चेतावनी दी है।
जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले में भी मांग: छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
जयपुर में छात्रसंघ चुनाव को लेकर बवाल क्यों मचा है?
राजस्थान की राजधानी जयपुर इन दिनों छात्र आंदोलन का गवाह बन रही है। दरअसल, पिछले चार वर्षों से राज्य में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं, जिसके चलते विद्यार्थी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हैं। इसी मुद्दे को लेकर एनएसयूआई (भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ) से जुड़े तीन छात्र नेता—विजयपाल कुड़ी, कोशेन खान और विओना जाट—ने विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिया।
गुरुवार (30 जुलाई) को सुबह करीब 8 बजे, तीनों छात्र जयपुर के टोंक फाटक स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए और वहाँ से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह टंकी गांधीनगर रेलवे स्टेशन के पास स्थित है, और छात्र टंकी के बाहरी रखरखाव वॉकवे पर सुरक्षा रेलिंग के पीछे बैठे हैं, जहाँ से वे अपने बैनर लहरा रहे हैं।
24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी क्यों अड़े हैं छात्र?
शुरू में छात्रों ने सादा प्रदर्शन किया, लेकिन जब प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो उन्होंने शुक्रवार (31 जुलाई) को अपना आंदोलन और तेज़ कर दिया। उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर दी, जिसका अर्थ है कि वे अब केवल पानी पीएंगे और जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक कोई भोजन नहीं ग्रहण करेंगे।
एनएसयूआई के प्रवक्ता रमेश भाटी ने बताया कि प्रशासन से बातचीत शुरू न होने के कारण छात्रों को भूख हड़ताल करने को मजबूर होना पड़ा। खुद विजयपाल कुड़ी ने मीडिया को बताया कि उनके पास करीब पाँच लीटर पानी है और उन्होंने कोई खाना नहीं रखा है। हालाँकि उन्होंने पहले कुछ खाना और एक रस्सी साथ लाई थी ताकि ज़रूरत पड़ने पर खाना ऊपर खींचा जा सके, लेकिन अब उन्होंने इरादा बदल दिया है।
एक और चुनौती उनके सामने है—शौचालय जाने की। करीब 24 घंटे से अधिक समय से वे शौचालय नहीं गए हैं। उन्होंने इस चुनौती को स्वीकारा है और कहा कि अभी तक वे संयमित हैं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, स्थिति कठिन होती जा रही है।
मौके पर क्या इंतजाम हैं और प्रशासन की क्या कार्रवाई है?
छात्रों के इस आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए, प्रशासन और पुलिस ने मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पानी की टंकी के नीचे बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है, साथ ही एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीम, मेडिकल टीम और एंबुलेंस भी मौजूद हैं। गांधीनगर एसीपी नारायण बाजिया लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
शुक्रवार रात को सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों से बातचीत की और उन्हें आश्वासन दिया, जिसके बाद करीब 40 घंटे बाद छात्र टंकी से नीचे उतरे। हालाँकि, छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि उन्होंने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है कि वे छात्रसंघ चुनाव कराने सहित अन्य मांगों पर फैसला लें। यदि इस अवधि में मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे और बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामला भी है शामिल
छात्रों की मांगों में सिर्फ छात्रसंघ चुनाव बहाल करना ही शामिल नहीं है, बल्कि उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज मामले में भी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक माफी की मांग की है और यह भी कहा है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई मामला दर्ज न किया जाए।
इसके अलावा, राजस्थान विश्वविद्यालय में भी छात्रों का आंदोलन जारी है। एक समूह पिछले 15 दिनों से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दे रहा है, जबकि एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने टोंक रोड पर ट्रैफिक ब्लॉकेड भी किया, जिसके चलते पुलिस ने 11 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वहीं, एक अन्य छात्र नेता शुभम रेवाड़ पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
निष्कर्ष: क्या होगा अब आगे?
जयपुर में छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्रों का आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। करीब 40 घंटे की कठिन हड़ताल के बाद छात्र टंकी से तो उतर गए, लेकिन उन्होंने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। अब सरकार पर दबाव है कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक मांगों को पूरा करे।
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